विशेष राज्य दर्जा और बिहार

भवतोष भास्कर

Abstract


प्राचीन समय में बिहार समृद्ध व गौरवशाली बिहार थी लेकिन वर्तमान बिहार तो बीमारू राज्य की श्रेणी में आता है। बिहार के पिछड़ेपन का कारण ब्रिटिश शासकों की दमनकारी नीति तथा स्वतंत्रता के बाद बिहार की उपेक्षा रहा है। कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक पिछड़ेपन का होना भी बिहार को बीमारू प्रदेश की श्रेणी में शामिल करता है। बुनियादी सुविधाओं का अल्प विकास और अधिक जनघनत्व, सामाजिक, आर्थिक पिछड़ेपन का होना है। प्राकृतिक या प्रौद्योगिक कारक जैसे बाढ़ बुनियादी सामाजिक आर्थिक क्षेत्रों में असमानता, राजनैतिक नेतृत्व की इच्छा में कमी और प्रशासनिक व कानून-व्यवस्था में गिरावट आना है। इस सब कारण से गैर विकास (Non-Development) का माहौल बना।

         सवाल यह है कि बिहार विकास के पथ पर कैसे अग्रसर होगा? क्या विशेष राज्य दर्जे ही विकास का एकमात्र रास्ता है? आखिर विशेष राज्य दर्जा क्या है? और क्या बिहार को विशेष राज्य दर्जा पाने के लिए पुख्ता सबूत काफी नहीं  है? इस आलेख में इन प्रमुख बिन्दुओं पर प्रकाश डाला गया है|


Keywords


Bihar, Special State, Status of Bihar

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References


Chapter 10, “The Fourteenth Finance Commission- Implications for fiscal Federalism in India”.

Govind Bhattacharya “The Reality of Special Category State”, EPW, Vol XLIX, No-40, Oct 4, 2014, p-52.

Special Category Status: A Case for Bihar, Monograph, ADRI, Patna, 2009, pp.8-9

शैवाल गुप्ता, “खास दर्जे की पुख्ता दलील”, राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, 16 मार्च 2013, p-1

Raghuvansh Prasad Singh, “Does Bihar require special status?” Indian Express, New Delhi, 27 March 2013.

शैवाल गुप्ता, “खास दर्जे की पुख्ता दलील”, राष्ट्रीय सहारा, नई दिल्ली, 16 मार्च 2013, p-1

Special Category Status: A Case for Bihar, Monograph, ADRI, Patna, 2009, p45.

Special Category Status: A Case for Bihar, Monograph, ADRI, Patna, 2009, p49.

Special Category Status: A Case for Bihar, Monograph, ADRI, Patna, 2009, pp 21-22.


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