सकारात्‍मक धर्म निरपेक्षता – लोहिया का वैचारिक पक्ष

Ashok Ahirwar

Abstract


धर्म भले विश्‍वास पर टिका हो लेकिन यह भी एक विचारधारा है ।  इस विचारधारा में तमाम तरह की उटपटांग चीजों के लिए गुंजायष बनी रहती है ।  पेढ की पूजा करो या पतथर की यह व्‍यक्ति का निजी मामला है ।  लेकिन जब एक पूरा समुदास श्रध्‍दा और भक्ति के साथ ऐसा करने लगता है तब यह धर्म बन जाता है ।  सभी विचारधाराओं मे धर्म सबसे ज्‍यादा पुराना है । आदमी पर उसकी पकड भी सबसे जबरदस्‍त है । यह तथ्‍य है कि धर्म दुनिया भर मे शोषण और अन्‍याय  को दूर करने मे विफल रहा है । यह तथ्‍य  है  की धर्म दुनिया भर में शोषण और अन्‍याय को दूर करने में विफल रहा है ।  सह व्‍यक्तिगतत नैतिकता को फैलाने में भी विफल रहा है ।  जबकि धर्मनिरपेक्षता की विचारधारामेंमनुष्‍य को अच्‍छ बनने की पूरी संभावना है । 


Keywords


सकारात्‍मक धर्मनिरपेक्षता, साप्रदायिक धर्म और राजनिती, सामाजिक व्‍यवस्‍था व धर्मनिरपेक्षता की विचारधारा

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