नज़ीर अकबराबादी के काव्य में आर्थिक परिदृश्य

Imran Ali

Abstract


नज़ीर ने अपने काव्य में रोटी, भूख, और पेट पर बहुत ज़ोर दिया है| मुख्यतः नज़ीर आम आदमी के कवि माने जाते है उन्होंने तत्कालीन सामज की आर्थिक परिस्थियों को भी अपने काव्य के माध्यम से उकेरने का कार्य किया है, जैसा कि हम जानते है कि रोटी, कपड़ा और मकान मनुष्य की मुलभूत आवश्यकताये हैं, धर्म जाति-पाति से अलग उसके लिए भोजन सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिसके लिए व्यक्ति की आर्थिक स्थिति मज़बूत होना भी आवश्यक है| नज़ीर ने मनुष्य की इन्ही आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपने काव्य में आर्थिक समस्याओं को बड़ी ही सहजता से उठाने का सफल प्रयत्न किया है|


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